भगवान शंकर पार्वती विवाह की परिक्रमा से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं- पंडित अजय शास्त्री



भारत सागर न्यूज/देवास।
यदि तुमने माता भगवती के उपवास किए  और साथ मे भगवती कथा श्रवण करने का अवसर प्राप्त हुआ तो आपका जीवन धन्य हो जाता है। सिर्फ उपवास रखने से कुछ नहीं होने वाला है। माता की उपासना सच्चे भाव से,सच्चे मन से करे। 




माता पार्वती ने कहा की मैं वरण करूंगी मगर विवाह करूंगी तो भगवान शंकर जी से और किसी दूसरे से नही। भगवान भोलेनाथ ओर माता पार्वती विवाह की जो परिक्रमा कर लेता है। उसके सात जन्मों के जाने अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। यह विचार रामी गुजराती माली धर्मशाला बड़ा बाजार चोपड़ा में चल रही देवी पुराण कथा के पांचवें दिन व्यास पीठ से पंडित अजय शास्त्री सिया वाले ने व्यक्त किए।  



उन्होंने आगे कहा कि शिव की कृपा के लिए समर्पण चाहिए। हमें भटकने की अपेक्षा शिव की शरण में जाना चाहिए। शिव का ह्रदय विष्णु नारायण तो नारायण का हृदय शिव है। इसलिए हमें शिव में और नारायण में कोई भेद नहीं करना चाहिए। समस्त जगत के पिता भगवान शिव को और माता भगवती पार्वती को माना गया है। 




शिव जगत के माता-पिता हैं। हम सब आत्माएं उनकी संतति हैं और जीवन में संकट आने पर संतान अपने जनक से उसके समाधान की प्रार्थना कर सकती हैं। हमें निरंतर भगवान शिव की आराधना में रत रहते हुए अपने जीवन को जीना चाहिए। आत्मा जब भगवान शिव और पार्वती की आराधना करती हैं, उन्हें आत्मा के माता-पिता की सेवा करने का पुण्य प्राप्त होता है। इस तरह शिव के दिव्या रहस्यों को समझ कर हमें अपने जीवन को जीना चाहिए। 




कथा पंडाल में शिव पार्वती विवाह बड़े धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान पंडित अजय शास्त्री ने भोले मुझको अपने चरणों में जगह  दीजिए भक्ति गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे। आयोजक मंडल रामी गुजराती माली समाज एवं  श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना कर महाआरती की। सैकड़ो धर्म प्रेमियों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया।



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