जिला पुर्नगठन आयोग को जिला बनाने का नही सिर्फ सिफारिश करने का अधिकार है: पूर्व विधायक गुर्जर

-जानकारी के अभाव में जनता को गुमराह ना करे विधायक चौहान



भारत सागर न्यूज/नागदा जं.। विधायक तेजबहादुरसिंह चौहान द्वारा व्यापारी संघ के कार्यक्रम में नागदा को जिला बनाने के संबंध में कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी द्वारा जिलो को लेकर पुर्नगठन आयोग का गठन किया गया है जिस कारण व्यवस्था बदली है पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने कहा है कि व्यवस्थाएं बदली है परंतु संविधान नही बदला है जिला बनाने के लिए प्रक्रिया व कानुन नही बदला है परिसीमन आयोग बनने के पश्चात भी शासन के नियम यथावत है आयोग के नाम पर नागदा को जिला नही बनाने का एक षडयंत्र है चौहान क्षेत्र की जनता के बीच अपना मत स्पष्ट करें कि वो नागदा को जिला बनाना चाहते है कि नही? 




गुर्जर ने कहा है कि दिनांक 12 मार्च 2024 को एक वर्ष की कार्यावधि हेतू नवीन प्रशासनीक इकार्ठ पुर्नगठन आयोग का गठन किया गया है परंतु नये जिले बनाने का अधिकार आयोग को भी नही है आयोग सिर्फ प्रस्ताव व सिफारिश करेगा जिला बनाने का कार्य राजस्व विभाग धारा 13 के अन्तर्गत जिला बनाने की प्रक्रिया पूर्ण करेगा वो ही प्रक्रिया है जो नागदा को जिला बनाने में हुई थी क्या श्रेय की राजनीति के चलते उसी प्रक्रिया को पुनः दोहराने का नाटक किया जाएगा? परिसीमन आयोग का गठन हुए एक वर्ष बीत चुका है एक वर्ष पश्चात विधायक तेजबहादुरसिंह कह रहे है कि जो जिले की कल्पना करते है वो उस आयोग के सामने अच्छे सुझाव व पक्ष प्रस्तुत करे मैं भी कर रहा हुं। जिला बनाने हेतू अभी तक विधायक तेजबहादुरसिंह द्वारा अपना कोई पक्ष आयोग के समक्ष प्रस्तुत नही किया है जिससे स्पष्ट होता है कि वो नागदा को जिला नही बनाना चाहते है यदि चाहते है तो वो जनता को अवगत कराएं कि वो जिले को लेकर कौन-कौन सी तहसीलों को मिलाकर जिला बनाने हेतू अपना क्या पक्ष आयोग के समक्ष रख रहे है? उसी अनुसार क्षेत्र की जनता अपना पक्ष रखेगी जिससे कि नागदा का पक्ष मजबुत हो। गुर्जर ने कहा है कि उज्जैन-रतलाम जिले की सीमाओं का परिवर्तन करके नागदा को नया जिला बनाने के गजट नोटिफिकेशन जारी कर आपत्तियों के निराकरण करने की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। 




पुर्नगठन आयोग भी राजस्व मंत्रालय के अधीन है नागदा को जिला बनाने की उक्त प्रक्रिया पुनः दोहराने का कोई वैधानिक प्रावधान नही है विधि का सिद्धांत है कि किसी भी नियम या अधिनियम का पूर्ववर्ती प्रभाव नही होता है परिसीमन आयोग का भी पूर्ववर्ती प्रभाव लागू नही होगा। गजट में अधिसूचना जारी होना व आपत्तियों का निराकरण करने के बाद जिला बनाने की अंतिम प्रक्रिया का गजट भी पूर्व से निर्धारित है। विधायक चौहान सत्तारूढ पार्टी के विधायक है यदि वो गजट अनुसार जिला बनाने की अंतिम प्रक्रिया पूर्ण करने की मांग करे तो शासन को किसी भी हालत में जिला बनाने की प्रक्रिया पूर्ण कर नागदा को जिला बनाने हेतू बाध्य होना पडेगा यहां बात विधायक चौहान भलीभांती जानते है कुछ अप्रत्यक्ष दबाव के चलते जनता को गुमराह कर रहे है। गुर्जर ने कहा कि कांग्रेस विधायकों के माध्यम से जिले के मुद्दे को उठाया गया था जिसपर शासन द्वारा विधानसभा में जवाब दिया जाता है कि परिक्षण किया जा रहा है कभी कहा जा रहा है कि आयोग के समक्ष विचाराधीन है परंतु विधायक चौहान द्वारा जिले को लेकर एक भी प्रश्न नही उठाया है। जबकि चुनाव पूर्व तेजबहादुरसिंह जी खुद कहते थे कि नागदा जिला बन चुका है। 



अजब विडम्बना है कि भाजपा की मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान नागदा को जिला बनाने की 3 बार घोषणा कर व विधानसभा चुनाव के पूर्व गजट नोटिफिकेशन जारी कर नागदा क्षेत्र की जनता को जिले का सपना दिखाकर वोट हथियाए है परंतु अब कह रहे है कि मुख्यमंत्री बदल गया है व्यवस्थाएं बदल गई है क्या यह जनता के साथ धोखा नही है? गुर्जर ने कहा है कि विधायक चौहान सत्तारूढ पार्टी के विधायक होते हुए भी क्षेत्र में आईटीआई कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज व अन्य मांग कर रहे है जिसमें शासन के नकारात्मक जवाब है यदि वो नागदा को जिला बनाने की अंतिम प्रक्रिया पूर्ण कर जिला बना लेवें तो मेडिकल कॉलेज, इंजीनियर कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, आईटीआई, जिला चिकित्सालय आदि करीब 50 से अधिक विभागों के कार्यालय नागदा में आ जाएगें जिससे कि नागदा में शिक्षा, रोजगार, व्यापार, व्यवसाय के खुब अवसर क्षेत्र की जनता को उपलब्ध होगें क्षेत्र में उन्नति व समृद्धि होगी।

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