"षष्टम देवी माँ कात्यायनी की वंदना"

 



अमोघ फलदायिनी पुत्री हैं कात्यायन की दुख शोक विनाशिनी हैं मात पराम्बा ,
सिंह की सवारी करतीं चार हैं भुजाएँ मातु की स्वर्ण सी दमकती हैं मात पराम्बा ,
संताप भय रोग शोक दूर करती जन्मों के पाप से भी तारती हैं मात पराम्बा ,
धर्म अर्थ काम मोक्ष के फल देतीं षष्ठम स्वरुपिणी कात्यायनी हैं मात पराम्बा ।।
आरती अक्षय गोस्वामी
देवास मध्यप्रदेश 


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